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अब खिलाड़ियों की अटेंडेंस नहीं होगी शॉर्ट , ड्यूटी टाइम में डॉक्टरों से नहीं मिल सकेंगे मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, जानें

➤ प्रतियोगिताओं में खेलने वाले छात्रों की अटेंडेंस में नहीं होगी कटौती
➤ ड्यूटी टाइम में डॉक्टरों से नहीं मिल सकेंगे मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव
➤ सीएम सुक्खू के निर्देश पर दो बड़ी व्यवस्थाएं लागू करने की प्रक्रिया शुरू

पराक्रम चंद, शिमला


हिमाचल प्रदेश सरकार ने दो बेहद महत्वपूर्ण व्यवस्थागत परिवर्तन लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं, जो राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को ज्यादा व्यवस्थित, संवेदनशील और जवाबदेह बनाएंगे। इन दोनों निर्णयों की पहल मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के स्तर पर हुई है, जिन्होंने समस्याओं को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए प्रभावी निर्णय लिए हैं।

पहला बड़ा फैसला स्कूली छात्रों से जुड़ा है। अब यदि कोई विद्यार्थी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए स्कूल से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी उपस्थिति को शॉर्ट नहीं माना जाएगा। यह समस्या वर्षों से चली आ रही थी और ऊना के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा ने इसे मुख्यमंत्री के सामने रखा था। उन्होंने कहा था कि ऐसे विद्यार्थी जो राज्य या देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें गैरहाजिर करार देकर नुकसान पहुँचाया जाता है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने तुरंत स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस संबंध में स्पष्ट अधिसूचना जारी करें। इसके तहत अब हेडमास्टर और स्कूल प्रिंसिपल को अटेंडेंस में रियायत देने की शक्ति दी जाएगी, जिससे खिलाड़ियों को मानसिक तनाव और शैक्षणिक नुकसान से राहत मिलेगी। यह निर्णय राज्य के खिलाड़ी विद्यार्थियों के हक में ऐतिहासिक माना जा रहा है।

दूसरा बड़ा निर्णय स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा है। अब से राजकीय मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों से ड्यूटी टाइम के दौरान मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) मुलाकात नहीं कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने इस पर शिमला के चमियाणा अस्पताल में पायलट लागू करते हुए व्यवस्था शुरू कर दी है।

सरकारी अस्पतालों में एमआर और डॉक्टरों की मुलाकातें अक्सर मरीजों की जांच व इलाज प्रक्रिया में बाधा बनती थीं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाया और साफ कर दिया कि ड्यूटी टाइम में एमआर से मुलाकात पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यदि कोई डॉक्टर आदेश के बावजूद एमआर से मिलता है, तो उसकी जवाबदेही तय की जाएगी।

हालांकि, डॉक्टर ड्यूटी समाप्त होने के बाद एमआर से मिलने के लिए स्वतंत्र होंगे। लेकिन यह नियम पूरे प्रदेश के अस्पतालों में क्रमबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

इन दोनों फैसलों को देखकर स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री सुक्खू प्रशासनिक कार्य संस्कृति में बदलाव, जनसंवेदनशीलता और न्यायपूर्ण प्रक्रियाओं के प्रति गंभीर हैं। यह राज्य के छात्रों और मरीजों के लिए राहत और जवाबदेही का संकेत है।